RBI गाइडलाइन, धमकी भरे कॉल्स से निपटने का तरीका, शिकायत प्रक्रिया

RBI गाइडलाइन 2025: फेक लोन ऐप और धमकी भरे कॉल्स से बचने का कानूनी तरीका

RBI गाइडलाइन 2025: फेक लोन ऐप और धमकी भरे कॉल्स से बचने का कानूनी तरीका

Written & Legally Reviewed by TABISH AHMAD  |  Cyber Safety & Financial Crime  |  BIHAR अद्यतन: 2025

⚡ सीधा उत्तर (Direct Answer): RBI ने 8 मई 2025 को Digital Lending Directions, 2025 जारी किए हैं। अब कोई भी लोन ऐप आपके Contacts, SMS, कॉल लॉग या गैलरी तक पहुँच नहीं माँग सकता। धमकी भरे कॉल्स पर तुरंत सबूत संजोएँ, RBI CMS पोर्टल (cms.rbi.org.in) और साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत करें। यदि 30 दिनों में RBI के Grievance Officer से संतोषजनक जवाब न मिले, तो RBI Integrated Ombudsman Scheme (RB-IOS) के तहत आगे की कार्रवाई करें।

🚨 फौरन कार्रवाई करें: अगर आपको धमकी भरे कॉल आ रहे हैं या पैसे कट गए हैं, तो तुरंत कॉल या WhatsApp करें।

फेक लोन ऐप क्या है? RBI की नई परिभाषा

फेक लोन ऐप (Fake Loan App) एक अनधिकृत मोबाइल एप्लिकेशन है जो खुद को RBI-registered Bank या NBFC बताता है, लेकिन वास्तव में यह व्यक्तिगत डेटा चोरी, छुपी फीस वसूली, और अनैतिक वसूली (unethical recovery) के लिए बनाया जाता है।

RBI के Digital Lending Directions, 2025 के अनुसार, कोई भी Digital Lending App (DLA) तभी वैध है जब:

  1. उसका Regulated Entity (RE) — Bank या NBFC — RBI के साथ registered हो।
  2. ऐप पर RE का नाम, Certificate of Registration (CoR) नंबर, और Grievance Redressal Officer का विवरण स्पष्ट रूप से दिखाया गया हो।
  3. ऋण स्वीकृति से पहले Key Fact Statement (KFS) प्रदान की गई हो, जिसमें Annual Percentage Rate (APR), सभी शुल्क, और चुकौती अनुसूची शामिल हों।

📌 महत्वपूर्ण: RBI ने CIMS पोर्टल के माध्यम से सभी वैध DLAs की एक सार्वजनिक निर्देशिका (Public Directory) बनाई है। लोन लेने से पहले इस निर्देशिका में ऐप का नाम जाँचना न भूलें!

RBI गाइडलाइन 2025: फेक ऐप्स पर कैसे लगाम लगाई गई?

क्या RBI ने वाकई नए Digital Lending Directions जारी किए हैं?

हाँ, 8 मई 2025 को RBI ने Reserve Bank of India (Digital Lending) Directions, 2025 जारी किए, जो पुराने Guidelines on Digital Lending, 2022 को निरस्त (repeal) करते हैं। ये नए नियम बोरोअर (borrower) की सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी और शिकायत निवारण पर सख्त हैं।

मुख्य नए प्रावधान (Key Provisions):

नियमविवरण
KFS अनिवार्यऋण स्वीकृति से पहले Key Fact Statement देना अनिवार्य; APR, फीस, और चुकौती स्पष्ट होनी चाहिए।
डिजिटल हस्ताक्षरपूरा लोन किट (KFS, Sanction Letter, T&C) IT Act, 2000 के तहत डिजिटल हस्ताक्षरित होना चाहिए और ईमेल/SMS पर स्वचालित रूप से भेजा जाना चाहिए।
Cooling-off Periodकम से कम 1 दिन का “cooling-off period” होना चाहिए, जिसमें बिना पेनल्टी के principal + proportionate APR चुकाकर ऋण समाप्त किया जा सके।
LSP पर निगरानीRE (Bank/NBFC) LSP (Lending Service Provider) के सभी कार्यों के लिए पूर्ण रूप से उत्तरदायी रहेगा।
DLA Directoryसभी REs को अपने DLAs की जानकारी CIMS पोर्टल पर 15 जून 2025 तक अपलोड करनी होगी; RBI इसे सार्वजनिक करेगा।

फेक लोन ऐप की पहचान: 8 लाल झंडे (Red Flags)

1.No RBI Registration: ऐप पर RBI-registered Bank या NBFC का नाम नहीं है, या CoR नंबर जाँच में फर्जी निकलता है।
2.Contacts/SMS Access: ऐप आपके संपर्क सूची, SMS inbox, कॉल लॉग, या गैलरी तक पहुँच माँगता है — RBI ने यह स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया है।
3.Upfront Fee: ऋण वितरण (disbursal) से पहले “processing fee”, “GST”, “insurance” या “clearing charges” माँगे जाते हैं। वैध NBFCs फीस को disbursed amount से काटते हैं, पहले नहीं माँगते।
4.No KFS / APR: Key Fact Statement नहीं दिखाई देती; ब्याज दर छुपी हुई है या बाद में पता चलती है।
5.Guaranteed Approval: “100% guaranteed approval”, “no CIBIL check” — वैध ऋणदाता creditworthiness जाँचते हैं।
6.WhatsApp/SMS Link: ऐप किसी अनधिकृत लिंक से भेजा गया है, न कि official app store से।
7.No Grievance Officer: ऐप या वेबसाइट पर शिकायत अधिकारी (Grievance Redressal Officer) का कोई विवरण नहीं।
8.High-Pressure Tactics: “Offer expires in 10 minutes” जैसी धमकी या तात्कालिकता (urgency) — यह dark pattern है, जो RBI द्वारा प्रतिबंधित है।
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धमकी भरे कॉल्स से निपटने का तरीका: 24-48 घंटों में करें ये 4 काम

अगर फेक लोन ऐप से धमकी भरे कॉल्स आ रहे हैं, तो तुरंत ये कदम उठाएँ:

  1. सबूत संजोएँ (Preserve Evidence): सभी SMS, WhatsApp चैट, कॉल लॉग, और ऐप स्क्रीनशॉट लें। कॉलर के नंबर, UPI IDs, भुगतान लिंक नोट करें। ऐप डिलीट न करें — पहले सबूत सुरक्षित करें।
  2. भुगतान रोकें (Stop Payments): किसी भी अज्ञात UPI ID या खाते में पैनिक पेमेंट न करें। यदि ऑटो-डेबिट (NACH/ECS) सक्रिय है, तो अपने बैंक से इसे रद्द (cancel) करवाएँ।
  3. कॉलर को लिखित रूप में जवाब दें: एक संक्षिप्त लिखित संचार (email/SMS) भेजें जिसमें कहें: “I am willing to discuss lawful repayment after reconciliation, but I object to illegal recovery conduct, contact-list misuse, threats, and privacy violations.” — यह आपकी कानूनी स्थिति को मजबूत करता है।
  4. अपने परिजनों और कार्यस्थल को सचेत करें: यदि कॉलर आपके संपर्क सूची में लोगों को परेशान कर रहे हैं, तो उन्हें सूचित करें कि यह फेक/अवैध वसूली है और वे कॉल्स रिकॉर्ड करें और ब्लॉक करें।
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शिकायत प्रक्रिया: RBI, साइबर अपराध, और पुलिस — कहाँ और कैसे करें?

RBI CMS पोर्टल (cms.rbi.org.in) पर शिकायत कैसे दर्ज करें?

RBI के Integrated Ombudsman Scheme (RB-IOS) के तहत:

  1. पहला कदम — RE को लिखित शिकायत: संबंधित Bank/NBFC के Grievance Redressal Officer को लिखित रूप में (email/registered post) भेजें।
  2. प्रतीक्षा अवधि: 30 दिन तक प्रतीक्षा करें।
  3. दूसरा कदम — RBI CMS पोर्टल: यदि 30 दिनों में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो cms.rbi.org.in पर शिकायत दर्ज करें।
  4. वैकल्पिक — भौतिक शिकायत: RBI के Centralised Receipt and Processing Centre, Chandigarh पर भी भेजी जा सकती है।

⚠️ महत्वपूर्ण: यदि ऐप किसी RE से जुड़ा नहीं है (पूरी तरह फेक), तो RBI CMS मार्ग प्रभावी नहीं होगा। तब साइबर अपराध पोर्टल और पुलिस FIR ही आपके मुख्य विकल्प हैं।

साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर कैसे करें शिकायत?

  1. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाएँ।
  2. “Report Financial Fraud” विकल्प चुनें।
  3. अपने सभी सबूत (screenshots, call logs, UPI details) अपलोड करें।
  4. शिकायत का acknowledgement संजोएँ — यह आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण है।

पुलिस FIR कब और कैसे दर्ज कराएँ?

यदि निम्नलिखित स्थितियाँ हैं, तो तुरंत अपने स्थानीय पुलिस थाने में FIR दर्ज कराएँ:

  • आर्थिक हानि हुई हो (पैसे कट गए हों)।
  • धमकी, ब्लैकमेल, या अश्लील संदेश भेजे जा रहे हों।
  • मॉर्फ्ड (edited) तस्वीरों से धमकाया जा रहा हो।
  • पुलिस या अदालत का आभासी अधिकारी बनकर धमकाया जा रहा हो (impersonation)।
  • परिजनों, विशेषकर महिला रिश्तेदारों, को अश्लील भाषा में कॉल किया जा रहा हो।

📌 BIHAR में FIR: BIHAR के किसी भी जिले के स्थानीय पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई जा सकती है। यदि थाना स्तर पर FIR दर्ज नहीं होती, तो SP कार्यालय या न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दी जा सकती है।

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कानूनी अधिकार और सुरक्षा: ये 4 कानून आपको बचाते हैं

  1. Reserve Bank of India (Digital Lending) Directions, 2025:
    • Clause 12(i): DLAs को contacts, call logs, SMS, gallery तक पहुँच से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करता है।
    • Clause 11: Grievance Redressal और RBI CMS/Ombudsman तक पहुँच का अधिकार।
  2. Information Technology Act, 2000:
    • Section 66C: Identity theft (पहचान की चोरी)।
    • Section 66D: Cheating by personation (धोखाधड़ी)।
    • Section 72A: अनधिकृत रूप से व्यक्तिगत जानकारी साझा करना।
  3. Indian Penal Code, 1860 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023):
    • Section 384/385/386: Extortion (जबरन वसूली/ब्लैकमेल)।
    • Section 503: Criminal intimidation (आपराधिक धमकी)।
    • Section 354D: Stalking (पीछा करना/परेशान करना)।
  4. Consumer Protection Act, 2019:
    • Unfair trade practices और deficient services के खिलाफ Consumer Commission में शिकायत।
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BIHAR में विशेष स्थिति: स्थानीय न्यायिक मंच और सहायता

BIHAR में Cyber Safety मामलों के लिए पुलिस Cyber Cell सक्रिय रूप से कार्यरत है:

  • FIR अपने जिले के साइबर थाने में दर्ज कराएँ।
  • यदि पुलिस तत्काल कार्रवाई नहीं करती, तो Chief Judicial Magistrate (CJM) की अदालत में Section 156(3) CrPC के तहत अर्जी दें।
  • BIHAR High Court, Patna में Writ Petition के माध्यम से सुरक्षा और न्याय की माँग की जा सकती है।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

1. क्या RBI ने 2025 में फेक लोन ऐप्स के लिए नए नियम बनाए हैं?
हाँ, RBI ने 8 मई 2025 को Reserve Bank of India (Digital Lending) Directions, 2025 जारी किए हैं, जो borrower protection और data privacy पर सख्त प्रावधान लाते हैं।
2. क्या कोई लोन ऐप मेरे contacts और photos तक पहुँच माँग सकता है?
नहीं। RBI Directions 2025 के Clause 12(i) के अनुसार, DLAs file and media, contact list, call logs, telephony functions तक पहुँच नहीं माँग सकते।
3. RBI CMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने से पहले क्या करना जरूरी है?
सबसे पहले Regulated Entity (Bank/NBFC) के Grievance Redressal Officer को लिखित शिकायत भेजें और 30 दिन तक प्रतीक्षा करें। इसके बाद ही RBI CMS या Ombudsman के पास जाएँ।
4. अगर फेक लोन ऐप मेरे परिजनों को धमका रहा है तो क्या करूँ?
सबूत संजोएँ, परिजनों को सचेत करें, cybercrime.gov.in पर शिकायत करें और यदि धमकी गंभीर हो तो स्थानीय पुलिस थाने में FIR लिखवाएँ।
5. क्या मुझे फेक लोन ऐप को पैसे चुकाने चाहिए?
नहीं, panic payment न करें। यदि ऐप अवैध है, तो भुगतान जबरन वसूली (extortion) को प्रोत्साहित करता है। कानूनी सलाह लें और केवल official channels के माध्यम से ही भुगतान करें।
6. RBI Digital Lending Directions 2025 में Cooling-off Period क्या है?
यह वह अवधि है (कम से कम 1 दिन) जिसमें borrower बिना पेनल्टी के principal + proportionate APR चुकाकर ऋण समाप्त कर सकता है।
7. क्या मैं Consumer Court में शिकायत कर सकता हूँ?
हाँ, यदि Unfair Trade Practice या Deficiency in Service का कारण बना है, तो Consumer Protection Act, 2019 के तहत शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
8. BIHAR में फेक लोन ऐप की शिकायत कहाँ करें?
cybercrime.gov.in, जिला साइबर सेल, या BIHAR High Court, Patna में कानूनी उपचार ले सकते हैं। RBI CMS का उपयोग केवल RBI-regulated entity के लिए करें।

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🏛️ Head Office Table No – NA, Shatabadi Bhawan, Advocates Association,
Veer Chand Patel Path, Patna – 800028
TABISH AHMAD
Practising Advocate — Cyber Safety, Digital Fraud & Financial Crime | BIHAR

BIHAR के विभिन्न न्यायालयों में व्यक्तिगत और व्यावसायिक ग्राहकों का प्रतिनिधित्व — District Courts, BIHAR High Court (Patna), और Cyber Crime Tribunals। फेक लोन ऐप हेरासमेंट, RBI-regulated lending disputes, और साइबर अपराध से संबंधित मामलों में रणनीतिक कानूनी सलाह और प्रभावी न्यायिक प्रतिनिधित्व।

⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer): यह ब्लॉग केवल सामान्य सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यह कानूनी सलाह नहीं है, न ही यह वकील-ग्राहक संबंध स्थापित करता है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे यहाँ निहित किसी भी जानकारी पर कार्य करने से पहले एक योग्य अधिवक्ता से परामर्श करें।

Reviewed & Approved for Publication by TABISH AHMAD

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